पटना में श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी से विवाद
अमित शाह, नितिन नवीन, जेपी नड्डा और रविशंकर प्रसाद ने जताया कड़ा विरोध, भाजपा नेताओं ने कहा मांगी माफी
पटना/नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बिहार की राजधानी पटना में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में खरगे ने भाषण के दौरान कहा, ‘मोदी का बाप भी जाएगा।’ उनकी इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, पूर्व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और सांसद रविशंकर प्रसाद समेत कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा को राजनीतिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताते हुए उनकी आलोचना की। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व से माफी मांगने की भी मांग की।
कार्यक्रम में क्या हुआ, कैसे शुरू हुआ विवाद?
पटना में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके माध्यम से विपक्ष के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
खरगे ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ऐसे मामलों में शामिल लोगों को जेल भेजने का काम करेगी। इसी दौरान कार्यक्रम में मौजूद एक व्यक्ति ने टिप्पणी की कि जब तक बगावत नहीं होगी, मोदी कहीं नहीं जाएंगे। इस पर खरगे ने जवाब देते हुए कहा, ‘मोदी का बाप भी जाएगा।’
इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम स्थल पर हंगामे जैसी स्थिति बन गई। खबरों के अनुसार, वहां मौजूद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता टिप्पणी करने वाले व्यक्ति की ओर बढ़े और उसे कार्यक्रम स्थल से बाहर कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद खरगे की टिप्पणी राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई।
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री और भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने अपने संबोधन में भाजपा और केंद्र सरकार पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने एसआईआर को लेकर आशंका जताई कि इसका इस्तेमाल विपक्ष के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है।
खरगे ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के माध्यम से सरकारें बनाई जा रही हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट होकर लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
उन्होंने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादों पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार के वादों तथा उनके क्रियान्वयन के बीच अंतर है। कांग्रेस अध्यक्ष ने लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
हालांकि, उनके भाषण के दौरान प्रधानमंत्री के पिता को लेकर की गई टिप्पणी ने चुनावी मुद्दों पर केंद्रित उनके संबोधन को व्यक्तिगत टिप्पणी के विवाद में बदल दिया।
अमित शाह बोले खरगे ने सारी मर्यादाएं तार-तार कर दीं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खरगे की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पटना में कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता के बारे में अभद्र टिप्पणी करके सारी मर्यादाएं तार-तार कर दी हैं।
शाह ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को निशाना बनाना कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री या उनके परिवार के संबंध में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया हो।
अमित शाह ने अपने बयान में प्रधानमंत्री की माता के बारे में की गई कथित टिप्पणियों, उन्हें ‘मौत का सौदागर’ कहे जाने और ‘चायवाला’ कहकर उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाए जाने का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी राजनीतिक विरोध के दौरान शालीनता की सीमाएं लांघ रही है। शाह के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में लगातार चुनावी हार से कांग्रेस में हताशा और निराशा बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के पास अब न कोई स्पष्ट नीति बची है और न ही कोई ठोस मुद्दा, इसलिए वह व्यक्तिगत टिप्पणियों की राजनीति कर रही है।
गृह मंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस जनता के बीच अपना जनाधार खो रही है और पार्टी के कार्यकर्ताओं का भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।
नितिन नवीन ने कहा यह कांग्रेस का वैचारिक दिवालियापन
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी खरगे के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सार्वजनिक मंच से इस्तेमाल की गई अमर्यादित और असंसदीय भाषा कांग्रेस के वैचारिक दिवालियापन को दर्शाती है।

नवीन ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध स्वाभाविक है, लेकिन विरोध करते समय भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्षी दलों की राजनीति में अब दिवंगत परिजनों को भी भाषणों के बीच घसीटा जाने लगा है।
भाजपा अध्यक्ष के अनुसार, राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नेताओं को सार्वजनिक जीवन में गरिमा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी ने राजनीतिक शिष्टाचार की सीमाओं का उल्लंघन किया है।
नवीन ने कहा कि देश की जनता इस तरह की राजनीति पर नजर रख रही है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
जेपी नड्डा ने कहा नफरत से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी खरगे की टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी कड़ी निंदा के योग्य है।

नड्डा ने आरोप लगाया कि बार-बार चुनावी हार का सामना कर रही कांग्रेस अपनी राजनीतिक हताशा प्रधानमंत्री और उनके परिवार पर टिप्पणियां करके जाहिर कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न केवल राजनीतिक मर्यादा की कमी दिखाता है, बल्कि देश की जनता का भी अपमान है।
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नड्डा ने दावा किया कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और उनके प्रति जनता के विश्वास से विपक्ष परेशान है। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि नफरत और अपमान की राजनीति के माध्यम से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।
उन्होंने भरोसा जताया कि देश की जनता इस तरह की राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।
रविशंकर प्रसाद बोले शर्मनाक और ओछी टिप्पणी
भाजपा सांसद और वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी खरगे के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी को शर्मनाक, अमर्यादित और ओछा बताया।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भाजपा इस बयान की कड़ी निंदा करती है और देश की जनता ऐसे बयानों को देख रही है। उन्होंने कहा कि जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी और राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की। प्रसाद ने दावा किया कि जिस तरह जनता ने विभिन्न चुनावों में कांग्रेस को जवाब दिया है, उसी तरह आगे भी पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उनकी प्रतिक्रिया का मुख्य केंद्र यह था कि राजनीतिक विरोध के नाम पर प्रधानमंत्री के परिवार को लेकर इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की राजनीति पर उठाए सवाल
खरगे की टिप्पणी को लेकर भाजपा नेताओं ने व्यापक राजनीतिक हमला बोला। उनका आरोप था कि कांग्रेस चुनावी मुद्दों और नीतिगत बहस के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा ले रही है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सरकार या प्रधानमंत्री की नीतियों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन इस आलोचना में भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी जरूरी है।उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या पार्टी अपने वरिष्ठ नेताओं की टिप्पणियों को उचित मानती है और क्या वह इस विवाद पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगेगी।
भाजपा का कहना है कि प्रधानमंत्री के प्रति राजनीतिक विरोध को उनके परिवार के सदस्यों तक ले जाना उचित नहीं है। वहीं, कांग्रेस का जोर चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और सरकार के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर है।
कांग्रेस की ओर से क्या सफाई दी गई?
खरगे की टिप्पणी पर उठे विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से भी उनका बचाव किया गया। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि खरगे की टिप्पणी का संदर्भ आरएसएस से था। उनके अनुसार, खरगे का आशय प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक संगठन आरएसएस को लेकर था।
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी टिप्पणी का बचाव करते हुए सवाल उठाया कि इसे अपमानजनक क्यों माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं भी राजनीतिक भाषणों में तीखी भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं और विपक्ष को भी अपनी बात रखने का अधिकार है।
कांग्रेस की ओर से सामने आए इन बयानों में खरगे की टिप्पणी को उसके राजनीतिक संदर्भ में देखने की दलील दी गई। हालांकि, भाजपा ने इस सफाई को पर्याप्त नहीं माना और प्रधानमंत्री के पिता के उल्लेख को लेकर विरोध जारी रखा।
